नया आयकर विधेयक 2025 (INCOME TAX BILL 2025): प्रमुख बदलाव और प्रभाव
भारत सरकार ने नया आयकर विधेयक 2025 पेश किया है, जो आयकर अधिनियम, 1961 के स्थान पर लाया जा रहा है। इस विधेयक का उद्देश्य करदाताओं के लिए नियमों को सरल बनाना, मुकदमों को कम करना और कर अनुपालन को अधिक सुविधाजनक बनाना है। इस लेख में, हम इस नए विधेयक के प्रमुख बदलावों और उनके प्रभावों की विस्तृत जानकारी देंगे।
1. कर वर्ष की नई अवधारणा
नए विधेयक में 'पिछले वर्ष' और 'कर निर्धारण वर्ष' की अवधारणा को समाप्त कर दिया गया है। अब केवल 'कर वर्ष' की प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे कर प्रक्रिया अधिक सरल हो जाएगी।
2. आयकर स्लैब में बदलाव
नए विधेयक में आयकर स्लैब निम्नलिखित रूप से संशोधित किए गए हैं:
- ₹4,00,000 तक: कोई कर नहीं
- ₹4,00,001 से ₹8,00,000: 5%
- ₹8,00,001 से ₹12,00,000: 10%
- ₹12,00,001 से ₹16,00,000: 15%
- ₹16,00,001 से ₹20,00,000: 20%
- ₹20,00,001 से ₹24,00,000: 25%
- ₹24,00,000 से अधिक: 30%
3. कर ऑडिट और रिटर्न फाइलिंग की समय-सीमा बढ़ी
- कर ऑडिट दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 अक्टूबर कर दी गई है।
- आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है।
4. वेतन, भत्ते और ग्रेच्युटी पर कर कटौती
- मानक कटौती ₹50,000 या वेतन की राशि (जो कम हो) तक होगी।
- सरकारी सेवाओं में ग्रेच्युटी और रक्षा सेवाओं के लिए सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी पूरी तरह से कर मुक्त होगी।
- सेवानिवृत्ति, अक्षमता या नौकरी समाप्ति पर ₹75,000 तक की ग्रेच्युटी कर मुक्त होगी।
5. पूंजीगत लाभ पर कर प्रावधान
नए विधेयक में पूंजीगत परिसंपत्ति के हस्तांतरण से उत्पन्न लाभ को कर योग्य माना गया है और यह उसी कर वर्ष में आय माना जाएगा, जिसमें हस्तांतरण हुआ हो।
6. व्यवसाय और पेशेवरों के लिए प्रकल्पित कर सीमा में वृद्धि
- व्यवसायों के लिए धारा 44AD की सीमा ₹2 करोड़ से बढ़ाकर ₹3 करोड़ कर दी गई है।
- पेशेवरों के लिए यह सीमा ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹1 करोड़ कर दी गई है।
7. पेंशन और मुआवजा कटौती
- सरकारी सेवाओं की पेंशन योजनाओं के तहत मिलने वाली पेंशन की गणना पूर्णत: कटौती योग्य होगी।
- औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत प्राप्त मुआवजा ₹50,000 तक कटौती योग्य होगा।
- स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) के तहत भुगतान ₹5,00,000 तक कर मुक्त होगा।
8. विधेयक के आकार में कमी
- वर्तमान आयकर अधिनियम में 823 पृष्ठ हैं, जबकि नया विधेयक 622 पृष्ठों का है।
- इसमें 536 धाराएँ, 23 अध्याय और 16 अनुसूचियाँ शामिल हैं।
- विधेयक को 25-30% संक्षिप्त बनाया गया है ताकि इसे आसानी से समझा जा सके।
9. गैर-अपराधीकरण दृष्टिकोण
- नए विधेयक में कर अनुपालन से संबंधित मामलों में गैर-अपराधीकरण दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।
- छोटे करदाताओं के लिए दंड के नियमों को नरम किया गया है।
10. विधेयक की अगली प्रक्रिया
- विधेयक को संसद में पेश करने के बाद, इसे वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा।
- समिति की सिफारिशों के बाद, इसे संसद और फिर कैबिनेट में अंतिम मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
- इसे अप्रैल 2026 से प्रभावी करने की संभावना है।
निष्कर्ष
नया आयकर विधेयक 2025 करदाताओं के लिए कर प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें कई सुधार किए गए हैं, जिससे कर अनुपालन आसान होगा, कर विवाद कम होंगे और करदाताओं को राहत मिलेगी। यदि यह विधेयक लागू होता है, तो यह भारतीय कर प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है।
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